Winner

“I was the winner of beauty contest in India. Now, I had to go to Italy to take part in International Beauty Contest. At the same time I got selected in the Indian Army. I had two choices. But I decided to serve my country. Now people call me as lieutenant GarimaYadav.“

Respect

Annona reticulata Ramfal

रामफल
रामफल को बहुत ही कम लोग जानते हैं,, मालवांचल के ग्रामीण क्षेत्र में इसकी उपलब्धता की कमी के कारण अक्सर लोग रामनाम लेते समय इसे छोड़ देते हैं…..।
रामफल(Annona reticulata) एक औषधीय पेड़ है,जिससे हम बिल्कुल अंजान हैं…यह सीताफल जैसा ही होता है केवल रामफल का बाहरी आवरण चिकना होता है और सीताफल का दानेदार …. बाकी पेड़, पत्ता और फल के अंदर का बीज लगभग एक जैसा होता है…..इसके पत्ते भी सीताफल की तरह ही होते है सिर्फ इन में धारियाँ बनी होती है……यह बहुत ही आसानी से पनपता हैं,ओर जानवर भी नुकसान भी नही पहुंचाते है..।

रामफल खून के दोषों को दूर करता है….. रामफल की जड़ मिर्गी से पीड़ित व्यक्ति को सुंघाने पर रोगी के मिर्गी का दौड़ा पड़ना रुक जाता है…।
रामफल को दुर्लभ होने से बचाये ,,हर गांव में इसका पौधा लगाए..।

The National Cancer Institute ने इस पौधे के पत्तों और स्टेमस (STEMS) का निरिक्षण किया, जिसमे उन्होंने पाया के यह पौधा कैंसर की घातक कोशिकाओं को नष्ट करने में बहुत सहायक है. …मगर आश्चर्य इस बात का है के इस रिपोर्ट को कभी सार्वजानिक नहीं किया गया. ……!!

केदारनाथ।।Kedarnath

केदारनाथ की यह तस्वीर 1882 में भूगर्भ सर्वेक्षण विभाग ने खींची थी. यह वो समय था जब हमारे पुरखे मानते थे कि ऊंचे हिमालयी इलाकों में इंसानी दखल कम से कम होना चाहिए. वे ऐसा मानते ही नहीं थे, अपने बरताव में इसका ख्याल भी रखते थे. जैसे बुग्यालों में जाने के ये अलिखित कायदे थे कि वहां जोर-जोर से न बोला जाए या खांसा भी धीरे से जाए. बताते हैं कि तब यात्री #गौरीकुंड से सुबह-सुबह निकलते थे और 14 किलोमीटर दूर केदारनाथ के दर्शन करके शाम तक वापस आ जाते थे. हमारे पुरखों ने केदारनाथ में जैसे भव्य मंदिर बना दिया था वैसे ही वहां रात बिताने के लिए और भवन भी वे बना ही सकते थे, लेकिन कुछ सोचकर ही उन्होंने ऐसा नहीं किया होगा. सोच शायद यही रही होगी कि जिस फसल से पेट भर रहा है उसके बीज हिफाजत से रखे जाएं. यानी करोड़ों लोगों का जीवन चलाने वाली गंगा-यमुना जैसी कितनी ही सदानीरा नदियों के स्रोत जिस हिमालय में हैं उसे कम से कम छेड़ा जाए.

लेकिन जिन इलाकों में जोर से न बोलने तक की सलाह थी वहां आज भयानक शोर है. यह शोर सड़कों और सुरंगों के लिए पहाड़ों को उड़ाते डायनामाइट का हो या साल-दर-साल बढ़ते श्रद्धालुओं को धाम पहुंचाने के लिए दिन में दसियों चक्कर लगाते हेलीकॉप्टरों का, इसने प्रकृति की नींद में खलल पैदा कर रखा है. अमरनाथ से लेकर केदारनाथ तक ऊंचे हिमालय में बसे हर तीर्थ का हाल एक जैसा है. नदियों के रास्ते में बेपरवाही से पुस्ते डालकर बना दिए गए मकान, रास्तों पर जगह-जगह फेंकी गई प्लास्टिक की बोतलों और थैलियों के अंबार और तीर्थों में फिल्मी गानों की पैरोडी पर लाउडस्पीकर से बजते कानफाड़ू गाने इशारा कर रहे हैं कि व्यवस्था के सुधरने की मांग करने से पहले एक समाज के रूप में हमें भी खुद को सुधारने की जरूरत है. नहीं सुधरेंगे तो यह परिमार्जन देर-सबेर प्रकृति खुद ही कर लेगी और वह कितना क्रूर हो सकता है यह हम देख ही रहे हैं..

कार्तिकेय मंदिर ।। Lord Karthikeya Temple,India

Arulmigu Dandayudhapani Swami Temple is one of the Six Abodes of lord karthikeya. It is located in the city of Palani in Dindigul district, 100 kilometres southeast of Coimbatore and northwest of Madurai in the foot-hills of the Palani hills, Tamil Nadu, India. Palani temple is considered synonymous with Panchamritam, a sweet mixture made of five ingredients.

Nearest International Airport- Coimbatore/ Madurai

हिन्दू की बोरी। Sack of hindu

कोई भी उभरता दल चाहे तो राष्ट्रीय राजनीति में तेज़ी से आगे आ सकता है। ये एकदम सही सिचुएशन है। हिंदुत्व की बोरी २०१४ से ज्यो कि त्यों पड़ी है। इसका कोई नामलेवा नहीं है। कुछ लोग मई २०१४ के बाद इसे रास्ते पर फेंक गए थे। बिल्कुल मुफ्त है और एक बार उठा ली तो शर्तिया दिल्ली के राजभवन पहुंचाती है।

शाशन कैसे किया जाता है

आप सिर्फ यही देख रहे हैं कि लोग मोदी की आलोचना कर रहे हैं। विरोधियों की छोड़िए वो कुत्ते की दुम हैं वो हमेशा विरोध करेंगे लेकिन अगर उनके समर्थक उनसे प्रश्न पूछ रहे हैं तो उसके कुछ निहितार्थ होंगे।

पूर्व की कांग्रेस सरकारों ने out of the way जाकर सिस्टम से खिलवाड़ किया और उसे अपने हिसाब से अपने मनमाफिक जैसे जी किया वैसे चलाया। मोदी जी क्यों नही उसी तरह “आउट ऑफ थे वे” जाकर सिस्टम को सुधार रहे हैं। 2014 में जब सरकार बनी थी तब तो समझ मे आता था कि सिस्टम भ्रष्ट था और वहां पर कांग्रेसी पिल्ले बैठ कर अपने आका के लिए काम कर रहे थे।

लेकिन इन 5 सालो में तो पर्याप्त समय था कि ऐसे लोगों को चिन्हित कर के हाशिये पर लाया जाए। लेकिन नही हुआ ऐसा। अभी हाल ही में आयकर आयुक्त S.K. Srivastava को जबरन सेवानिवृत्ति दी गयी और कहा जाता था कि उन्होने NDTV पर कार्रवाई की थी। ऐसे ही बहुत सारे उदाहरण हैं जहाँ मोदी जी की उदारवादी छवि दिख रही है।

एक प्रधानमंत्री के लिए देशकाल और परिस्थितियां तो चुनौती हो सकती हैं लेकिन अगर वह संस्थाओं और नकारात्मक लोगो को चुनौती मान रहा है तो यह बात हज़म नही होती। मैं फिर कह रहा हूँ एक बहुमत की सरकार को अगर कमजोर विपक्ष और सरकारी संस्थान चुनौती देने में सफल हो रहे हैं और वो उनका सख्ती से दमन नही कर पा रही है तो इसे सरकार की कमजोरी ही मानी जायेगी।

एक प्रधानमंत्री के रूप में अगर वो ये कह के रो रहे हैं कि उनकी जान को खतरा है तो माफ किजिये इससे उनकी कोई बहुत अच्छी छवि नही बन रही है।

आलोक कुमार वर्मा को CBI चीफ किसने बनाया ये जानते हुए भी की वो कांग्रेसी दलाल है ???

क्यों नही वरिष्ठता को नजरअंदाज कर के किसी निष्पक्ष अधिकारी को ये कुर्सी सौंपी गई……

बंगाल के हालात क्यों केंद्र के नियंत्रण से बाहर हैं ??

मैं ये सब बातें इसलिए नही कह रहा हूँ कि मुझे मोदी विरोध और निष्पक्षता के कीड़े ने काटा है बल्कि इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि एक ऐसा व्यक्ति प्रधानमंत्री है जिससे ये अपेक्षा थी कि वो दबावों से ऊपर उठकर और डंके की चोट पर सख्त शासन करेगा। ये अपेक्षा नही थी कि दो दो कौड़ी के लोग उन्हें चुनौती दे और वो ये कहें कि उनके सामने बहुत सारी चुनौतियां हैं। ये बात मनमोहन सिंह कहते तो समझ मे आती थी कि उनके ऊपर एक सुपर PM बैठी थी।